सेलाकुई में पनीर-दही कार्रवाई पर उठे सवाल

Questions raised on action of cheese and curd in Selaqui

देहरादून। सेलाकुई क्षेत्र में दो फरवरी 2026 को पनीर और दही को लेकर की गई पुलिस कार्रवाई अब विभाग के लिए गले की फांस बन गई है। कार्रवाई में प्रक्रियात्मक खामियों और लापरवाही के आरोपों के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। शिकायत मिलने के बाद प्रभारी पुलिस महानिरीक्षक रेंज सदानंद दाते के निर्देश पर जांच कराई गई, जिसके आधार पर बड़ी कार्रवाई करते हुए वरिष्ठ उपनिरीक्षक जितेंद्र कुमार सहित तीन पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया गया है।

पुलिस के अनुसार सेलाकुई पुलिस और खाद्य एवं औषधि प्रशासन की टीम ने संयुक्त कार्रवाई में एक दुकान से 250 किलो पनीर और 50 किलो दही बरामद किया था। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मौके पर पनीर को बदबूदार और खराब बताते हुए नष्ट कर दिया था।

दूसरी ओर दुकानदार ने पुलिस पर उत्पीड़न और प्रक्रिया में गड़बड़ी के गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि उनकी जीएसटी बिल वाली दही को नकली बताकर कार्रवाई की गई और वाहन को गलत तरीके से सीज कर दिया गया। पूरी कार्रवाई दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हुई, जिसके आधार पर उन्होंने प्रभारी पुलिस महानिरीक्षक रेंज सदानंद दाते से शिकायत की।

पीड़ित पक्ष का आरोप है कि जब वे थाने में मौजूद थे और वाहन भी थाने परिसर में खड़ा था, तब वाहन का 28,500 रुपये का चालान ओवरस्पीड और सीट बेल्ट जैसी धाराओं में कर दिया गया। उनका दावा है कि सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक वे और उनका वाहन थाने में थे, जबकि पुलिस ने धूलकोट तिराहे से दही बरामदगी की बात कही।

पीड़ित का कहना है कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 105 के तहत जब्ती और तलाशी के दौरान वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी अनिवार्य है, लेकिन इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। साथ ही डेयरी उत्पादों को कई घंटों तक धूप में वाहन में खड़ा रखा गया, जिससे उनकी गुणवत्ता प्रभावित होना स्वाभाविक है। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि जब वाहन पुलिस के कब्जे में था तो सामग्री में बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

पीड़ित पक्ष का कहना है कि कार्रवाई के दौरान थानाध्यक्ष पी.डी. भट्ट टीम का नेतृत्व कर रहे थे, जिसका उल्लेख प्रेस विज्ञप्ति में भी था, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। परिवार ने मामले को लेकर पुलिस महानिदेशक से भी शिकायत करने की बात कही है।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (अब निवर्तमान) देहरादून अजय सिंह का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ नियमानुसार कार्रवाई की गई थी। उनके अनुसार पनीर के नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए हैं और रिपोर्ट का इंतजार है। जहां तक सीसीटीवी फुटेज का सवाल है, उसमें पनीर को वापस गाड़ी में रखे जाने की बात सामने आई है।

मामले में सामने आए सीसीटीवी फुटेज ने पुलिस के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। फुटेज के आधार पर दावा किया गया कि दुकान के बाहर रखा पनीर वापस वाहन में रखवाया जा रहा था, जबकि पुलिस का कहना था कि पनीर वाहन से बरामद हुआ। इस विरोधाभास के बाद पूरी कार्रवाई संदेह के घेरे में आ गई है। अब जांच रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं।