- पिस्ता, खजूर, केसर, सेब और कीवी हुए महंगे
- लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ने से भारत के निर्यात पर भी पड़ेगा असर
मोहम्मद शाह नज़र
देहरादून। इजरायल-अमेरिका के ईरान पर हमले के बाद पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव की तपिश अब स्थानीय बाजारों तक महसूस की जाने लगी है। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद हालात लगातार बिगड़ रहे हैं। ऊर्जा आपूर्ति, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और समुद्री मार्गों को लेकर बनी अनिश्चितता का असर भारत के बाजारों पर भी साफ दिखने लगा है।
उत्तराखंड की अस्थायी राजधानी देहरादून स्थित कृषि मंडी के कारोबारियों का कहना है कि ईरान से आयात होने वाले पिस्ता, खजूर, केसर, सेब और कीवी जैसे फलों के दामों में तेजी आने लगी है। आने वाले दिनों में इनकी कीमतें और बढ़ सकती हैं।
कीवी 1500 से पहुंची 1800 रुपये
कोहिनूर फ्रूट सेंटर के स्वामी मोहम्मद गुफरान ने बताया कि ईरान से आने वाली खजूर सबसे सस्ती मानी जाती है। ‘हनी प्लम’ किस्म की खजूर कम कीमत के कारण सर्वाधिक बिकती है, लेकिन युद्ध शुरू होते ही दामों में बढ़ोतरी हो गई है। उन्होंने बताया कि जो कीवी पहले 1500 रुपये प्रति पेटी मिल रही थी, वह अब 1800 रुपये तक पहुंच गई है। ईरान से चावल, पिस्ता, खजूर, केसर समेत कई सूखे मेवे भारत आते हैं। सप्लाई चेन बाधित होने पर इन सभी वस्तुओं की कीमतों में और उछाल आ सकता है।
रेड सी कॉरिडोर पर बढ़ा जोखिम
एक अन्य कारोबारी फहीम अहमद ने बताया कि मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का सीधा असर समुद्री व्यापार पर पड़ता है। रेड सी कॉरिडोर और आसपास के समुद्री मार्गों पर जोखिम बढ़ने से जहाजों का बीमा महंगा हो जाता है और माल ढुलाई लागत बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि इसका असर केवल कच्चे तेल तक सीमित नहीं रहता, बल्कि अन्य आयात-निर्यात वस्तुएं भी प्रभावित होती हैं। लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ने से भारत का निर्यात महंगा हो सकता है, जिससे वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा पर असर पड़ने की आशंका है। व्यापारियों का मानना है कि यदि हालात जल्द सामान्य नहीं हुए तो आने वाले समय में आम उपभोक्ता को सूखे मेवे और फलों के लिए और अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है।

