- साक्ष्य नष्ट करने के लिए विधायक सरकार जिम्मेदारः कांग्रेस
- कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल के बयान पर कांग्रेस ने किया पलटवार
देहरादून। पूर्व विधायक सुरेश राठौर की कथित पत्नी उर्मिला सनावर के वीडियो के बाद सुर्खियों में आए अंकिता भंडारी हत्याकांड के मामले में अब सरकार और कांग्रेस आमने सामने आकर एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहें हैं। शुक्रवार को जहां कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने भाजपा मुख्यालय में प्रेस वार्ता कर सरकार का पक्ष रखा, उनियाल के बयान पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने भी सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि ‘सरकार ने आंखों पर पट्टी बांधी है और कानों में रुई भरी हुई है।
साथियों नमस्कार,
आपने ‘एडिक्शन’ शब्द जरूर सुना होगा। दुर्भाग्य की बात है कि आज राज्य की सरकार भ्रष्टाचार और दुराचार की एडिक्ट हो चुकी है। pic.twitter.com/2l6JQjAEMX— Ganesh Godiyal (@UKGaneshGodiyal) January 2, 2026
उनियाल को जवाब देते हुए गोदियाल ने कहा कि दरअसल, सरकार ने आंखों पर पट्टी बांधी है और कानों में रुई भरी हुई है, सरकार अपनी आंखें और कान बंद कर चुकी है, लेकिन उसका मुंह खुला हुआ है। कहा कि इस प्रकरण में क्या यह बात किसी से छुपी हुई है कि साक्ष्य नष्ट करने के लिए सीधे तौर पर उनके विधायक और मुख्यमंत्री पूरी तरह से जिम्मेदार हैं।
अगर जांच एजेंसी इनसे पूछताछ करती है तो सबूत भी यही से आएंगे। उस एसआइटी से भी साक्ष्य सामने आएंगे, जिस एसआइटी ने अंकिता हत्याकांड की जांच की है, रिजॉर्ट में साक्ष्य मिटाने के लिए कौन अधिकारी और विधायक जिम्मेदार रहे, क्या सरकार को यह मालूम नहीं है। इसलिए सरकार को फिजूल के स्पष्टीकरण को बंद करके, इस प्रकरण की जांच सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश की देखरेख में सीबीआई से करानी चाहिए। सत्यता यह है कि सरकार को यह पता है कि कथित वीआइपी कौन है और सबूत नष्ट होने के बाद सरकार जानबूझकर पुख्ता साक्ष्य प्रस्तुत करने की चुनौती दे रही है।
साहू का बयान भाजपा की घृणित मानसिकता का प्रतीकः कांग्रेस
देहरादून। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्य के पति व भाजपा नेता गिरधारी लाल साहू के महिलाओं को लेकर दिए गए बयान की कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने कहा कि यह बयान सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि महिलाओं के प्रति पूरी भाजपा की कुत्सित सोच को उजागर करता है।
गोदियाल ने आरोप लगाया कि भाजपा शासन में उत्तराखंड महिलाओं के खिलाफ अपराधों में हिमालयी राज्यों में पहले स्थान पर पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि सत्ताधारी दल के नेताओं की नजर में मातृशक्ति की कीमत 20-25 हजार रुपये लगाना बेहद शर्मनाक है।



