हल्द्वानी के बनभूलपुरा केस में सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला

Important decision of Supreme Court in Haldwani Banbhoolpura case

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड के हल्द्वानी के बनभूलपुरा में रेलवे की जमीन से अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जमीन रेलवे की है और कब्जा हटना अनिवार्य है। हालांकि, कोर्ट ने ईद के बाद पुनर्वास कैंप लगाने, पात्रों को पीएम आवास देने और 6 महीने तक भत्ता देने का निर्देश दिया है।

अदालत ने निर्देश दिया कि नैनीताल जिले की राजस्व प्राधिकरण, जिला प्रशासन और रेलवे संयुक्त रूप से कैंप लगाएं, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के पात्र लोग प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत आवेदन कर सकें। ईद (19 मार्च) के बाद एक सप्ताह का विशेष कैंप लगाया जाएगा। आदेश के मुताबिक, बनभूलपुरा में पुनर्वास केंद्र बनाएं जाए और हर परिवार का हेड यहां पर जाए।

यह विवाद हल्द्वानी के बनभूलपुरा क्षेत्र में रेलवे की लगभग 29–30 हेक्टेयर भूमि पर बसे हजारों परिवारों से जुड़ा है। रेलवे का दावा है कि इस जमीन पर वर्षों से अवैध कब्जा है, जिससे परियोजनाएं प्रभावित हो रही हैं। इससे पहले उत्तराखंड हाई कोर्ट ने अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए प्रभावित लोगों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा: संबंधित भूमि इंडियन रैलवे की है।
रेलवे को अपनी भूमि के उपयोग का पूरा अधिकार है। अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया कानून के अनुसार पूरी की जाए। प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए राज्य सरकार योजना बनाए।
अदालत ने यह भी कहा कि किसी भी कार्रवाई में मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जाए और पात्र परिवारों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिया जाए।

राज्य सरकार ने अदालत को आश्वस्त किया है कि पात्र लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना सहित अन्य आवास योजनाओं का लाभ दिलाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। जिला प्रशासन द्वारा शिविर लगाकर पात्रता जांच और आवेदन की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।

यह पूरा क्षेत्र उत्तराखंड के नैनीताल जिले में आता है। स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर दी है ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो। अधिकारियों का कहना है कि अदालत के निर्देशों का पालन चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा।

यह मामला केवल भूमि विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि हजारों परिवारों के भविष्य से जुड़ा है। एक ओर रेलवे की विकास योजनाएं हैं, तो दूसरी ओर वर्षों से बसे लोगों का आशियाना। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में दोनों पक्षों के अधिकारों के संतुलन की बात कही है। अदालत ने प्रशासन को प्रक्रिया की निगरानी करने और अगली सुनवाई में प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। आने वाले हफ्तों में अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही और पुनर्वास प्रक्रिया तेज हो सकती है।